कविता में बांध प्रभावितों की बदहाली
राकेश दीवान प्रेमशंकर रघुवंशी की लंबी कविता 'डूबकर डूबा नहीं हरसूद' का पहला पाठ करते हुए विक्रम सेठ की बरसों पहले (1991 में प्रकाशित) पढ़ी लंबी कविता बीस्टली टेल्स याद आती रही। सेठ ने अंग्रेजी कविता में एक काल्पनिक बांध से डूबने वाले जंगल के रहवासी तमाम जानवरों के साहस और संघर्ष की मार्फत …
अनुपस्थिति में उपस्थिति का अहसास
राधेलाल बिजघावने रचनाकार अनुपस्थिति में भी घर परिवार, समाज संस्कृति में उपस्थित होता है। रचनाकार की अनुपस्थिति में उपस्थिति उसकी रचनाएं दर्ज करती हैं। उसकी रचनाएं अनुपस्थिति में समाज संस्कृति के सुधार की और विकास की भाषा बोलती हैं। और मनुष्य के आर्थिक सुधार के लिए पहल भी करती हैं। इसलिए लेखक की रच…
बेचैनी का बयान
विजय मोहन तिवारी डूबकर नहीं डूबा हरसूद। प्रोफेसर प्रेमशंकर रघुवंशी की लंबी कविता एक ऐसे समय आई है, जब देशभर की हमारी सरकारें अपने राज्यों में पूंजी निवेश की खातिर दुनियाभर के धनपतियों के स्वागत में दरवाजे पर वंदनवार सजाकर सिर पर मंगल कलश लिए खड़ी हैं। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री और नए राज्य तेलंग…
प्रेमशंकर रघुवंशी की काव्य-सर्जना : विज्ञान बोध के आयाम
डॉ. वीरेन्द्र सिंह बट्रेन्ड रसेल अपनी पुस्तक 'वैज्ञानिक अंर्तदृष्टि' (साइन्टेफिक इनसाइट) में विज्ञान के दो पक्षों की ओर संकेत करता है एक विज्ञान का तकनीकी पक्ष तथा दूसरा उसका वैचारिक या चिंतन पक्ष। ये दोनों पक्ष एक दूसरे के पूरक हैं या सापेक्ष हैं, पर विडंबना यह रही कि हम तकनीकी या यांत्रि…
इसलिए बड़े कवि हैं कि....
सूरज पालीवाल बड़ी नदी जहां से भी गुजरती है, वहां केवल हरा-भरा ही नहीं करती बल्कि लोगों के अंदर जिजीविषा भी पैदा करती चलती है। जीवन पानी के बिना कुछ भी नहीं है और पानी का दृश्यमान उद्गम है। हिंदी के वरिष्ठ कवि प्रेमशंकर रघुवंशी की कविताओं को पढते हए मझे हमेशा नर्मदा की कल-कल धारा याद आती है। नर्…
उनकी ही कविता-पंक्तियों से
रामकुमार कृषक डॉ. प्रेमशंकर रघुवंशी की एक संस्मरण कृति है 'टिगरिया का लोकदेवता भवानी प्रसाद मिश्र।' देखने में सब कुछ बेसिलसिला, लेकिन सिलसिला ऐसा कि उनकी सृजनात्मकता जा जादू सिर चढ़कर बोले । उन्हीं के कहे, 'यहाँ आप संस्मरण विधा को एक समावेशी विधा के रूप में देख सकेंगे।' सिर्फ बातों…